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Tuesday, August 29, 2017

Praveen Singh

भारतीय संस्कृति, परंपरा के बारे में कोर्स तैयार करेगा NCERT



मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने आज कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी, इतिहास से संबंधित भारतीय परंपरा और संस्कृति के बारे में कुछ कोर्स तैयार करेगी. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय में भारत बोध व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ करते हुए जावडेकर ने कहा कि भारत की शिक्षा पद्धति ऐसी हो गई है कि हम भारत की संस्कृति के बारे में भूलते जा रहे हैं और शेष दुनिया को याद रखने पर जोर दे रहे हैं.

मंत्री ने कहा कि दुनिया को जानना और याद रखना जरूरी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम भारत और उसके गौरवशाली आतीत को भूल जाएं. मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि हम एनसीईआरटी के साथ ऐसे कोर्स को आगे बढ़ाएंगे जो भारत और उसके गौरवशाली आतीत को भूलने ना दें. हमारा मानना है कि हमारी सही पहचान हमारे अपने देश की पहचान के साथ शुरू होती हैं. बिना इसे जाने, हम दुनिया के बारे में छिपी बातों को नहीं जान पायेंगे. हमारा अपने अतीत के मूल्यों के बारे में चर्चा करने के बारे में खुला रूख हैं.

साथ ही कहा कि दर्शनशास्त्र और इंडोलॉजी से जुड़े सभी छात्रों को इस व्याख्यान में शामिल होना चाहिए. जावडेकर ने कहा कि अगर हम भारत के बारे में नहीं जानेंगे तो हम अपनी सही पहचान के बारे में नहीं जान पायेंगे. ऐसे में हमें अपने देश की सही पहचान जाननी चाहिए. इग्नू के कुलपति रविन्द्र कुमार ने कहा कि 'हम जल्द ही भारत बोध के बारे में एक नया औपचारिक सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करेंगे.

गौरतलब हैं कि एनसीईआरटी अपने सिलेबस में नया विषय जोड़ने पर ध्यान दे रही है जिससे वर्तमान पीड़ि और आगे आने वाली पीड़ियां अपने देश और उसकी गौरवशीलता से भरे आतीत को ओर करीब से जान पाएंगे. साथ ही इग्नू भी इसी विषय को ध्यान में रखते हुए एक नया औपचारिक सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करेगी.


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Wednesday, August 9, 2017

Praveen Singh

एनसीईआरटी किताबों की किल्लत होगी खत्म, घर बैठे मिलेगी


एनसीईआरटी किताबों की कमी के चलते स्कूलों को अब निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाने के लिए मजबूर नहीं होना होगा। एनसीईआरटी ने इससे निपटने की पूरी तैयारी कर ली है। जिसके तहत स्कूलों को जरुरत के मुताबिक किताबें एडवांस में उपलब्ध कराई जाएगी, बशर्ते स्कूलों को अपनी मांग एनसीईआरटी को पहले देनी होगी। इतना ही नहीं, स्कूलों के अलावा कोई विक्रेता या अभिभावक भी घर बैठे एनसीईआरटी की किताबें मंगा सकेगा।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद( एनसीईआरटी) ने किताबों की इस किल्लत को खत्म करने की तैयारी शुरु कर दी है। इसे लेकर एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है, जिसमें स्कूल, पुस्तक विक्रेता या फिर कोई निजी व्यक्ति भी सीधे जाकर अपनी मांग भेज सकेगा। इस पूरे सिस्टम में ऑनलाइन पेमेंट की भी व्यवस्था की गई है। एनसीईआरटी की मानें तो इस पूरी प्रक्रिया के पीछे मकसद यह है कि स्कूलों की मांग का पहले पता चल जाए, ताकि उसके मुताबिक किताबों का समय पर प्रकाशन हो सके।

एनसीईआरटी ने इसके साथ ही स्कूलों से अगले साल के लिए किताबों की मांग भी लेनी शुरु कर दी है। इसके तहत स्कूलों से आठ सितंबर तक अपनी मांग देने को कहा गया है। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाह ने बुधवार को इस पूरी व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत की। इस दौरान मंत्रालय के स्कूली शिक्षा सचिव अनिल स्वरुप ने साफ किया कि इसका मतलब यह कतई नहीं है, कि स्कूलों में एनसीईआरटी को अनिवार्य किया जा रहा है। बल्कि स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराई जाएगी। एनसीईआरटी ने पिछले साल भी स्कूलों को मांग के मुताबिक किताबें उपलब्ध कराने की तैयारी की थी, लेकिन मांग पहले न मिलने के चलते तमाम स्कूलों को अंतिम समय में किताबें नहीं मिल पायी थी।

सीबीएसई ने स्कूलों को लिखी चिट्ठी 

एनसीईआरटी की इस पहल के बाद सीबीएसई ने देश भर के अपने सभी स्कूलों को चिट्ठी लिखकर एडवांस में ही एनसीईआरटी की किताबों की बुकिंग कराने को कहा है। सीबीएसई के चेयरमैन आर के चतुर्वेदी ने बताया कि सभी 18 हजार स्कूलों को एनसीईआरटी द्वारा शुरु किए गए वेब पोर्टल की जानकारी भी दी गई है। साथ ही बताया कि वह शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए अभी से अपनी मांग एनसीईआरटी को दे दे, ताकि किताबें समय पर उन्हें मिल सके।


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