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Friday, June 2, 2017

Praveen Singh

राजस्थान विश्वविद्यालय में यूजी के लिए प्रवेश प्रकिया शुरू



जयपुर

राजस्थान विश्वविद्यालय ने यूजी में प्रवेश के लिए आवेदन प्रकिया आज से शुरू कर दी है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर प्रोस्पेक्टस भी जारी कर दिया हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय के सत्र 2017-18 के लिए स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

 प्रवेश कमेटी के संयोजक प्रो. एसएल शर्मा ने बताया कि पहली बार ग्रेजुएशन एडमिशन रजिस्ट्रेशन फीस 100 रुपए ऑनलाइन नेट बैंकिंग, डेबिट-क्रेडिट कार्ड के जरिए भुगतान की व्यवस्था की गई है। प्रवेश कार्यक्रम के अनुसार राजस्थान विश्वविद्यालय के संघटक राजस्थान, कॉमर्स, महाराजा और महारानी कॉलेज के यूजी विषयों में प्रवेश के लिए आवेदन करने के लिए विद्यार्थियों को सिर्फ दस दिन मिलेंगे।

 जिसमें दस जून तक विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद सभी महाविद्यालयों की प्रवेश कमेटी मेरिट के आधार पर पहली कट ऑफ लिस्ट पन्द्रह जून को जारी करेगी।


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Monday, May 22, 2017

Praveen Singh

सुविधाएं चाहिए तो ब्लॉक से बाहर जाएं शिक्षक

जयपुर | प्रदेशआवासीय शिविरों का विरोध कर रहे शिक्षकों को सुविधाएं चाहिए तो ब्लॉक से बाहर जाना पड़ सकता है। राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद ने आदेश जारी कर कहा कि शिविरों में प्रशिक्षण स्थल पर अगर सुविधाएं नहीं है, तो जिला प्रशिक्षण समिति नजदीकी ब्लॉकों में सुविधायुक्त स्थानों पर शिविर आयोजित करने का निर्णय ले सकती है। स्थान किसी एक प्रशिक्षणार्थी का नहीं बदलेगा। इससे पहले शनिवार को पहले चरण के प्रशिक्षण शिविरों का समापन हो गया। अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल और राजस्थान प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शशिभूषण शर्मा का कहना है कि आवासीय शिविरों का विरोध जारी रहेगा।

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Praveen Singh

एसबीसी के 400 अभ्यर्थियों को ओबीसी कैटेगरी में नियुक्ति दो

एसबीसीके 1252 विवादित पदों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर नियुक्ति देने के मद्देनजर गुर्जरों ने राज्य सरकार से मांग रखी है कि करीब 400 अभ्यर्थी, जो ओबीसी की वरीयता सूची में रहे हैं, उन्हें ओबीसी कैटेगरी में नियुक्ति दी जाय। उधर राज्य सरकार इस मुद्दे पर कानूनी राय लेने का मन बना रही है क्योंकि एसबीसी की पांचों जातियां ओबीसी से निकलकर एसबीसी में आई थी। सरकार के मंत्रियों अफसरों ने भी कानूनी राय लेना उपयुक्त माना है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर 2016 को एसबीसी आरक्षण खत्म कर दिया था और इस फैसले के विरोध में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी, जहां यह मामला लंबित है।

अब देवनारायण योजना पर भी विवाद

सालाना200 करोड़ रु. की इस योजना पर भी विवाद शुरू हो गया है। जिलाें में तैनात अधिकारियों ने राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है कि योजना में फायदा दें या नहीं। इस विवाद के बीच गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने राज्य सरकार को एक प्रजेंटेशन भेजा है, जिसमें कहा गया है कि देवनारायण योजना को एसबीसी आरक्षण से जोड़कर देखा जाय। ये योजना एसबीसी आरक्षण से पहले, चौपड़ा कमेटी की सिफारिशों पर 18 दिसंबर 2007 को शुरू हुई थी। एसबीसी आरक्षण विधेयक 25 जुलाई 2008 को आया, उसके एक साल बाद आरक्षण लागू हुआ और 10 अक्टूबर 2009 कोे इस पर हाई कोर्ट ने स्टे लगाया था। उसके बाद 6 मई 2010 को 1 प्रतिशत एसबीसी आरक्षण मिला है। समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह के अनुसार फिलहाल इस योजना में 41 हॉस्टल, 9 - 9 आवासीय विद्यालय और विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप मिल रही है। राज्य सरकार की एसबीसी सब-कमेटी के मंत्री पूर्व में कह चुके हैं कि देवनारायण योजना कल्याणकारी है, इसलिए इसे बंद करने की कोई मंशा नहीं है। 

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Praveen Singh

जैव विविधता को बढ़ावा देता गागंल्यावास विद्यालय



लालसोट. आम तौर पर ग्रामीण इलाकों में बसे लोगों को जैव विविधता शब्द के मतलब के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है, वहीं शहरी क्षेत्र के लोगों की जुबान से भी यदा कदा ही सुनाई देता है।  ऐसे माहौल के बीच जब  विभिन्न जीवों व वनस्पति के संरक्षण के लिए कोई नवाचार करे वह अपने आप में अनुकरणीय भी होता है।

 कुछ ऐसा ही नजरा दिखाई दिया विश्व जैव विविधता दिवस से एक दिन पूर्व रामगढ़ पचवारा क्षेत्र के गांगल्यावास गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में। जब पत्रिका टीम विद्यालय परिसर पहुंची तो पूरा परिसर पक्षियों के कलरव से गूंज रहा था और वहां विभिन्न औषधियों के पौधों की भीनी भीनी खुशबू से महक भी रहा था। 

इस  विद्यालय में पक्षी एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कई नवाचार देखने को मिले। विद्यालय में पक्षियों के दाना-पानी के लिए लगाए पक्षी रेस्टोरेन्ट में  कबूतर व अन्य पक्षी  चुग्गा चुगते, पानी पीते, एवं झूला झूलते देखे गए। इसके अलावा करीब 750 वर्ग गज भूमि पर फैले इस विद्यालय में विभिन्न औषधि पौधों का भी रोपण किया गया है।

 विद्यालय में एक स्थान पर औषध गिरी तैयार किया है, उसमें अश्वगंधा, रक्त रोधिका, तुलसी, सुदर्शन, पत्थर चट्टा, ग्ंवारपाठा, कालीमिर्च जैसे पौधे हिन्दी अंग्रेजी वनस्पतिक नाम पटिïïï्का के साथ रोपित किए गए हैं। वर्तमान में ये सभी पौधे पूर्णरूप से पुष्पित व पल्लवित है, साथ ही बालकों को स्थानीय क्षेत्र में सहज उपलब्ध औषधीय पौधों की भी जानकारी मिल रही है। 

जन्मदिन के मौके पर विद्यार्थी करते हैं सार संभाल 

पक्षी रेस्टोरेन्ट की नियमित सार संभाल के लिए भी विद्यालय में अनूठी व्यवस्था है। प्रधानाचार्य के अनुसार इसमें पानी व चुग्गे की व्यवस्था वह विद्यार्थी करता है जिसका जन्म दिन होता है। विद्यार्थियों के नाम,  जन्म दिन के मौके पर शुभकामना संदेश भी पक्षी रेस्टोरेन्ट के पास ही बोर्ड पर लिखने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सप्त धान्य का चीटी चुग्गा भी प्रतिदिन डालने की व्यवस्था करते हुए  छोटे-छोटे प्राणियों के संरक्षण का भी संदेश दिया गया है। 

कक्षा कक्षों के नामकरण से मिलती है प्रेरणा 

विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पक्षी एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने के कई आकर्षक तौर तरीकों का भी प्रयोग किया गया है। कक्षा कक्षों के नामकरण  सेव बर्ड सैक्सन, सेव इकालॉजी सैक्सन, सेव गर्ल सैक्सन एवं सेव इण्डियन आर्मी सैक्सन नाम पर किए गए हैं।

 इसके अलावा कक्षों की सज्जा भी इसी  थीम पर ही की गई है। कक्षा कक्षों में भी पक्षियों के चित्रों से बाल मनोभावों की सहज अभिव्यक्ति दृष्टिगत होती है। कक्षा कक्षों में प्लास्टिक के कचरे से विभिन्न साज सज्जा की सामग्री बनाना कचरे से करिश्मा की थीम को व्यक्त करती है। 

क्या कहना है कि प्रधानाचार्य का

विद्यालय के प्रधानाचार्य शिवशंकर प्रजापति ने बताया कि शिक्षा का उदï्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रख कर शिक्षण के साथ ही विद्यार्थी में प्राणी मात्र एवं पर्यावरण के प्रति सुह्रदयता का विकास हो इसी मन्तव्य के साथ के साथ ये नवाचार क्रियान्वित किए गए है। जो न्यून व्यय में अधिक संस्कार देने वाले है। (नि.प्र.)


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Thursday, May 18, 2017

Praveen Singh

राजस्थान यूनिवर्सिटी ने मान लिए 5 पेपर आउट, दोबारा होंगी परीक्षाएं, यहां देखें घोषित हुई नई तारीखें


जयपुर। ।
राजस्थान विश्वविद्यालय में पेपर लीक प्रकरण के बाद एग्जामिनेशन प्लानिंग एंड मॉनीटरिंग कमेटी ने बीकॉम पार्ट तृतीय वर्ष के पांच पेपरों को आउट मानते हुए निरस्त कर दिया। विश्वविद्यालय ने प्रशासन ने इनकी परीक्षा के लिए अब नई तिथि घोषित की है। 

निरस्त माने गए पेपरों में बीकॉम पार्ट तृतीय वर्ष का अकाउंट्स एण्ड बिजनेस स्टेटिक्स का प्रथम और द्वितीय पेपर, इकॉनोमिकस एडमिनेस्ट्रेशन एण्ड फाइनेशियल मैनेजमेंट का प्रथम और द्वितीय पेपर और बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन का द्वितीय पेपर शामिल है।

ये नई तिथियां

परीक्षा नियंत्रक बीएल गुप्ता ने बताया निरस्त पेपरो की दुबारा परीक्षा के लिए नई तिथि घोषित की गई है। इनमें अकाउंट्स एण्ड बिजनेस स्टेटिक्स के प्रथम पेपर की परीक्षा 29 मई, द्वितीय पेपर की परीक्षा 31 मई को, इकॉनोमिकस एडमिनेस्ट्रेशन एण्ड फाइनेशियल मैनेजमेंट के प्रथम पेपर की परीक्षा 2 जून, द्वितीय पेपर की 5 जून तथा बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन केे द्वितीय पेपर की परीक्षा 7 जून को होगी। 


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Praveen Singh

आंगनबाड़ी केंद्र पर ग्रीष्मकालीन अवकाश रहा तो बच्चे रहेंगे पोषाहार से वंचित

जयपुर. ।
आंगनबाड़ी वर्करों की ग्रीष्मकालीन अवकाश की मांग ने पोषाहार व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाले बच्चों को न तो शीतकालीन अवकाश से कोई लेना-देना है और ना ही ग्रीष्मकालीन अवकाश से। केंद्र पर नहीं आने का मतलब है इनका पेट खाली रह जाना। यही वजह है कि वे हर रोज अपने घर से नंगे पैर ही केंद्र खुलने के समय दौड़ पड़ते हैं और पोषाहार लेकर लौट जाते है। ये हैं इन मासूमों की मजबूरी।

दरअसल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रीष्मकालीन अवकाश की मांग कर रही है। अब यदि सरकार ग्रीष्मकाल में दो माह का अवकाश रखती है तो इन मासूमों को पोषाहार नहीं मिल सकेगा। सवाल ये उठता है कि सरकार अवकाश देती है तो कौन बांटेगा इन मासूमों को पोषाहार? विभाग की मानें तो केंद्र सरकार ने स्पष्ट गाइडलाइन दे रखी है कि आंगनबाड़ी केंद्र खोलने की पहली प्राथमिकता है 'पोषाहार बांटना'

ऐसे में केंद्र पर छुट्टी नहीं रखी जा सकती है। वहीं अखिल राज. महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ और अखिल राज. महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ, एकीकृत जैसे संगठनों ने स्कूलों की तर्ज पर केंद्र पर अवकाश रखने की मांग की है और पोषाहार बांटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था।
125 ग्राम पोषाहार के मायने
पूरे प्रदेश में तकरीबन 63 हजार आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं। एक केंद्र पर 15 से 25 बच्चे आ रहे हैं। विभाग की मानें तो 70 प्रतिशत मासूम पोषाहार लेकर लौटते हैं। उन्हें शाला पूर्व शिक्षा देने के लिए रोकना पड़ता है। इन बच्चों को हर रोज 125 ग्राम पोषाहार दिया जाता है, जिसमें दलिया, खिचड़ी, उपमा, पंजीरी व हलवा शामिल है।

आंगनबाड़ी वर्कर पूरे साल भर काम करती हैं, ऐसे में उन्हें भी स्कूल शिक्षकों की तरह अवकाश मिलना चाहिए। पोषाहार वितरण कार्यक्रम प्रभावित ना हो इसके लिए बारी-बारी से वर्कर्स को 15—15 दिन का अवकाश देने का सुझाव सरकार को भेजा है। यदि अवकाश का प्रावधान नहीं किया गया तो यह वर्कर्स के साथ अन्याय होगा।
- छोटेलाल बुनकर, संस्थापक संरक्षक
अखिल राज. महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ।

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