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Friday, June 2, 2017

Praveen Singh

राजस्थान विश्वविद्यालय में यूजी के लिए प्रवेश प्रकिया शुरू



जयपुर

राजस्थान विश्वविद्यालय ने यूजी में प्रवेश के लिए आवेदन प्रकिया आज से शुरू कर दी है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर प्रोस्पेक्टस भी जारी कर दिया हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय के सत्र 2017-18 के लिए स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

 प्रवेश कमेटी के संयोजक प्रो. एसएल शर्मा ने बताया कि पहली बार ग्रेजुएशन एडमिशन रजिस्ट्रेशन फीस 100 रुपए ऑनलाइन नेट बैंकिंग, डेबिट-क्रेडिट कार्ड के जरिए भुगतान की व्यवस्था की गई है। प्रवेश कार्यक्रम के अनुसार राजस्थान विश्वविद्यालय के संघटक राजस्थान, कॉमर्स, महाराजा और महारानी कॉलेज के यूजी विषयों में प्रवेश के लिए आवेदन करने के लिए विद्यार्थियों को सिर्फ दस दिन मिलेंगे।

 जिसमें दस जून तक विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद सभी महाविद्यालयों की प्रवेश कमेटी मेरिट के आधार पर पहली कट ऑफ लिस्ट पन्द्रह जून को जारी करेगी।


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Monday, May 22, 2017

Praveen Singh

सुविधाएं चाहिए तो ब्लॉक से बाहर जाएं शिक्षक

जयपुर | प्रदेशआवासीय शिविरों का विरोध कर रहे शिक्षकों को सुविधाएं चाहिए तो ब्लॉक से बाहर जाना पड़ सकता है। राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद ने आदेश जारी कर कहा कि शिविरों में प्रशिक्षण स्थल पर अगर सुविधाएं नहीं है, तो जिला प्रशिक्षण समिति नजदीकी ब्लॉकों में सुविधायुक्त स्थानों पर शिविर आयोजित करने का निर्णय ले सकती है। स्थान किसी एक प्रशिक्षणार्थी का नहीं बदलेगा। इससे पहले शनिवार को पहले चरण के प्रशिक्षण शिविरों का समापन हो गया। अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल और राजस्थान प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शशिभूषण शर्मा का कहना है कि आवासीय शिविरों का विरोध जारी रहेगा।

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Praveen Singh

एसबीसी के 400 अभ्यर्थियों को ओबीसी कैटेगरी में नियुक्ति दो

एसबीसीके 1252 विवादित पदों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर नियुक्ति देने के मद्देनजर गुर्जरों ने राज्य सरकार से मांग रखी है कि करीब 400 अभ्यर्थी, जो ओबीसी की वरीयता सूची में रहे हैं, उन्हें ओबीसी कैटेगरी में नियुक्ति दी जाय। उधर राज्य सरकार इस मुद्दे पर कानूनी राय लेने का मन बना रही है क्योंकि एसबीसी की पांचों जातियां ओबीसी से निकलकर एसबीसी में आई थी। सरकार के मंत्रियों अफसरों ने भी कानूनी राय लेना उपयुक्त माना है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर 2016 को एसबीसी आरक्षण खत्म कर दिया था और इस फैसले के विरोध में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी, जहां यह मामला लंबित है।

अब देवनारायण योजना पर भी विवाद

सालाना200 करोड़ रु. की इस योजना पर भी विवाद शुरू हो गया है। जिलाें में तैनात अधिकारियों ने राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है कि योजना में फायदा दें या नहीं। इस विवाद के बीच गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने राज्य सरकार को एक प्रजेंटेशन भेजा है, जिसमें कहा गया है कि देवनारायण योजना को एसबीसी आरक्षण से जोड़कर देखा जाय। ये योजना एसबीसी आरक्षण से पहले, चौपड़ा कमेटी की सिफारिशों पर 18 दिसंबर 2007 को शुरू हुई थी। एसबीसी आरक्षण विधेयक 25 जुलाई 2008 को आया, उसके एक साल बाद आरक्षण लागू हुआ और 10 अक्टूबर 2009 कोे इस पर हाई कोर्ट ने स्टे लगाया था। उसके बाद 6 मई 2010 को 1 प्रतिशत एसबीसी आरक्षण मिला है। समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह के अनुसार फिलहाल इस योजना में 41 हॉस्टल, 9 - 9 आवासीय विद्यालय और विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप मिल रही है। राज्य सरकार की एसबीसी सब-कमेटी के मंत्री पूर्व में कह चुके हैं कि देवनारायण योजना कल्याणकारी है, इसलिए इसे बंद करने की कोई मंशा नहीं है। 

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Praveen Singh

जैव विविधता को बढ़ावा देता गागंल्यावास विद्यालय



लालसोट. आम तौर पर ग्रामीण इलाकों में बसे लोगों को जैव विविधता शब्द के मतलब के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है, वहीं शहरी क्षेत्र के लोगों की जुबान से भी यदा कदा ही सुनाई देता है।  ऐसे माहौल के बीच जब  विभिन्न जीवों व वनस्पति के संरक्षण के लिए कोई नवाचार करे वह अपने आप में अनुकरणीय भी होता है।

 कुछ ऐसा ही नजरा दिखाई दिया विश्व जैव विविधता दिवस से एक दिन पूर्व रामगढ़ पचवारा क्षेत्र के गांगल्यावास गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में। जब पत्रिका टीम विद्यालय परिसर पहुंची तो पूरा परिसर पक्षियों के कलरव से गूंज रहा था और वहां विभिन्न औषधियों के पौधों की भीनी भीनी खुशबू से महक भी रहा था। 

इस  विद्यालय में पक्षी एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कई नवाचार देखने को मिले। विद्यालय में पक्षियों के दाना-पानी के लिए लगाए पक्षी रेस्टोरेन्ट में  कबूतर व अन्य पक्षी  चुग्गा चुगते, पानी पीते, एवं झूला झूलते देखे गए। इसके अलावा करीब 750 वर्ग गज भूमि पर फैले इस विद्यालय में विभिन्न औषधि पौधों का भी रोपण किया गया है।

 विद्यालय में एक स्थान पर औषध गिरी तैयार किया है, उसमें अश्वगंधा, रक्त रोधिका, तुलसी, सुदर्शन, पत्थर चट्टा, ग्ंवारपाठा, कालीमिर्च जैसे पौधे हिन्दी अंग्रेजी वनस्पतिक नाम पटिïïï्का के साथ रोपित किए गए हैं। वर्तमान में ये सभी पौधे पूर्णरूप से पुष्पित व पल्लवित है, साथ ही बालकों को स्थानीय क्षेत्र में सहज उपलब्ध औषधीय पौधों की भी जानकारी मिल रही है। 

जन्मदिन के मौके पर विद्यार्थी करते हैं सार संभाल 

पक्षी रेस्टोरेन्ट की नियमित सार संभाल के लिए भी विद्यालय में अनूठी व्यवस्था है। प्रधानाचार्य के अनुसार इसमें पानी व चुग्गे की व्यवस्था वह विद्यार्थी करता है जिसका जन्म दिन होता है। विद्यार्थियों के नाम,  जन्म दिन के मौके पर शुभकामना संदेश भी पक्षी रेस्टोरेन्ट के पास ही बोर्ड पर लिखने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सप्त धान्य का चीटी चुग्गा भी प्रतिदिन डालने की व्यवस्था करते हुए  छोटे-छोटे प्राणियों के संरक्षण का भी संदेश दिया गया है। 

कक्षा कक्षों के नामकरण से मिलती है प्रेरणा 

विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पक्षी एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने के कई आकर्षक तौर तरीकों का भी प्रयोग किया गया है। कक्षा कक्षों के नामकरण  सेव बर्ड सैक्सन, सेव इकालॉजी सैक्सन, सेव गर्ल सैक्सन एवं सेव इण्डियन आर्मी सैक्सन नाम पर किए गए हैं।

 इसके अलावा कक्षों की सज्जा भी इसी  थीम पर ही की गई है। कक्षा कक्षों में भी पक्षियों के चित्रों से बाल मनोभावों की सहज अभिव्यक्ति दृष्टिगत होती है। कक्षा कक्षों में प्लास्टिक के कचरे से विभिन्न साज सज्जा की सामग्री बनाना कचरे से करिश्मा की थीम को व्यक्त करती है। 

क्या कहना है कि प्रधानाचार्य का

विद्यालय के प्रधानाचार्य शिवशंकर प्रजापति ने बताया कि शिक्षा का उदï्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रख कर शिक्षण के साथ ही विद्यार्थी में प्राणी मात्र एवं पर्यावरण के प्रति सुह्रदयता का विकास हो इसी मन्तव्य के साथ के साथ ये नवाचार क्रियान्वित किए गए है। जो न्यून व्यय में अधिक संस्कार देने वाले है। (नि.प्र.)


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Thursday, May 18, 2017

Praveen Singh

राजस्थान यूनिवर्सिटी ने मान लिए 5 पेपर आउट, दोबारा होंगी परीक्षाएं, यहां देखें घोषित हुई नई तारीखें


जयपुर। ।
राजस्थान विश्वविद्यालय में पेपर लीक प्रकरण के बाद एग्जामिनेशन प्लानिंग एंड मॉनीटरिंग कमेटी ने बीकॉम पार्ट तृतीय वर्ष के पांच पेपरों को आउट मानते हुए निरस्त कर दिया। विश्वविद्यालय ने प्रशासन ने इनकी परीक्षा के लिए अब नई तिथि घोषित की है। 

निरस्त माने गए पेपरों में बीकॉम पार्ट तृतीय वर्ष का अकाउंट्स एण्ड बिजनेस स्टेटिक्स का प्रथम और द्वितीय पेपर, इकॉनोमिकस एडमिनेस्ट्रेशन एण्ड फाइनेशियल मैनेजमेंट का प्रथम और द्वितीय पेपर और बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन का द्वितीय पेपर शामिल है।

ये नई तिथियां

परीक्षा नियंत्रक बीएल गुप्ता ने बताया निरस्त पेपरो की दुबारा परीक्षा के लिए नई तिथि घोषित की गई है। इनमें अकाउंट्स एण्ड बिजनेस स्टेटिक्स के प्रथम पेपर की परीक्षा 29 मई, द्वितीय पेपर की परीक्षा 31 मई को, इकॉनोमिकस एडमिनेस्ट्रेशन एण्ड फाइनेशियल मैनेजमेंट के प्रथम पेपर की परीक्षा 2 जून, द्वितीय पेपर की 5 जून तथा बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन केे द्वितीय पेपर की परीक्षा 7 जून को होगी। 


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Praveen Singh

आंगनबाड़ी केंद्र पर ग्रीष्मकालीन अवकाश रहा तो बच्चे रहेंगे पोषाहार से वंचित

जयपुर. ।
आंगनबाड़ी वर्करों की ग्रीष्मकालीन अवकाश की मांग ने पोषाहार व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाले बच्चों को न तो शीतकालीन अवकाश से कोई लेना-देना है और ना ही ग्रीष्मकालीन अवकाश से। केंद्र पर नहीं आने का मतलब है इनका पेट खाली रह जाना। यही वजह है कि वे हर रोज अपने घर से नंगे पैर ही केंद्र खुलने के समय दौड़ पड़ते हैं और पोषाहार लेकर लौट जाते है। ये हैं इन मासूमों की मजबूरी।

दरअसल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रीष्मकालीन अवकाश की मांग कर रही है। अब यदि सरकार ग्रीष्मकाल में दो माह का अवकाश रखती है तो इन मासूमों को पोषाहार नहीं मिल सकेगा। सवाल ये उठता है कि सरकार अवकाश देती है तो कौन बांटेगा इन मासूमों को पोषाहार? विभाग की मानें तो केंद्र सरकार ने स्पष्ट गाइडलाइन दे रखी है कि आंगनबाड़ी केंद्र खोलने की पहली प्राथमिकता है 'पोषाहार बांटना'

ऐसे में केंद्र पर छुट्टी नहीं रखी जा सकती है। वहीं अखिल राज. महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ और अखिल राज. महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ, एकीकृत जैसे संगठनों ने स्कूलों की तर्ज पर केंद्र पर अवकाश रखने की मांग की है और पोषाहार बांटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था।
125 ग्राम पोषाहार के मायने
पूरे प्रदेश में तकरीबन 63 हजार आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं। एक केंद्र पर 15 से 25 बच्चे आ रहे हैं। विभाग की मानें तो 70 प्रतिशत मासूम पोषाहार लेकर लौटते हैं। उन्हें शाला पूर्व शिक्षा देने के लिए रोकना पड़ता है। इन बच्चों को हर रोज 125 ग्राम पोषाहार दिया जाता है, जिसमें दलिया, खिचड़ी, उपमा, पंजीरी व हलवा शामिल है।

आंगनबाड़ी वर्कर पूरे साल भर काम करती हैं, ऐसे में उन्हें भी स्कूल शिक्षकों की तरह अवकाश मिलना चाहिए। पोषाहार वितरण कार्यक्रम प्रभावित ना हो इसके लिए बारी-बारी से वर्कर्स को 15—15 दिन का अवकाश देने का सुझाव सरकार को भेजा है। यदि अवकाश का प्रावधान नहीं किया गया तो यह वर्कर्स के साथ अन्याय होगा।
- छोटेलाल बुनकर, संस्थापक संरक्षक
अखिल राज. महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ।

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Wednesday, May 10, 2017

Praveen Singh

हाथ की बीमारी ने 9 साल के बच्चे को स्कूल से निकलवा दिया, पढें दिल पिघलाने वाली स्टोरी


इमरान सिदिृकी/जयपुर.
महज 9 साल की उम्र और एक लगभग लाइलाज बीमारी का बोझ उठाने की पीड़ा। लोगों को इस बच्चे की बीमारी से घिन इतनी आई कि गांव के स्कूल में उसे कक्षा में बैठने से ही मना कर दिया गया। इलाहाबाद के मानिकपुर का रहने वाला 9 साल का गोलू एलीफैंट फूट जैसी एक लाइलाज बीमारी से पीडि़त है।

पैदाइश से ही उसका दांया हाथ एलीफैंट फुट जैसी रेयर बेमारी के कारण असामान्य रूप से सूजा हुआ है। इस बीमारी के इलाज के लिए 3 महीने पहले इलाहाबाद से परिवार जयपुर आया। यहां सवाई मानसिंह अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टर बोले कि इलाज संभव नहीं हाथ काटना पड़ेगा। बच्चे के पिता रामकिशन बच्चे की बीमारी के लिए हर संभव करने को तैयार है लेकिन हाथ कटवाने को राजी नहीं है।

परिवार के गुजर-बसर के लिए बड़ी चौपड़ फलों ठेला लगाते हैं। कहते हैं हाथ नहीं कटाऊंगा अपने बच्चे का। गोलू भी इस हाथ से सारे काम जैसे बाल्टी उठाना चीजों को पकडऩा और सामान्य रूप से उपयोग में लेने जैसे काम कर लेता है।कई जगह भटके लेकिन नहीं बनी बातगोलू ने बताया कि बचपन में इस हाथ का इलाज चला था। उस समय इसका मांस निकाल दिया था लेकिन कुछ ही महीनों में फिर से पहले जैसा हो गया।

गांव के लोगों की सलाह पर जयपुर आए हैं। इससे पहले नैनीताल, दिल्ली, मुम्बई और अन्य बड़े शहरों में भी डॉक्टर्स को दिखाया लेकिन इलाज कहीं भी नहीं हो पाया। परिवार की माली हालत भी ठीक नहीं है। ऐसे में निजी अस्पताल में जाकर इलाज का खर्चा उठाने में भी असमर्थ हैं। गोलू यूं तो विश्वास से भरा हुआ है लेकिन वो लोगों की निगाहों से विचलित हो जाता है। उसे पढऩा पसंद है

लेकिन उसे स्कूल से सिर्फ इस बात के लिए स्कूल आने से मना कर दिया कि बाकी बच्चे उसके असामान्य हाथ को देख कर डरते हैं। गोलू अभी अपने पिता के साथ स्टेशन से बड़ी चौपड़ आ जाता है और शाम को उनके ठेले के साथ वापस लौट जाता है। कुछ लोगों ने उन्हें उदयपुर में महावीर विकलांग संस्थान जाने की सलाह भी दी है।

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Tuesday, May 2, 2017

Praveen Singh

आर्थिक कमज़ोर' बच्चे भी अब पढ़ेंगे 'महंगे' प्राइवेट स्कूल में, RTE के तहत निकाली गई लॉटरी


जयपुर
शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने प्रदेश में आरटीई के तहत स्कूलों में प्रवेश के लिए निकली लॉटरी निकाली।  देवनानी ने शिक्षा संकुल में 3 हज़ार 322 स्कूलों में प्रवेश के लिए लॉटरी निकाली है।  

दरअसल, शिक्षा का अधिकार कानून आरटीई के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश के लिए लॉटरी निकाली गई है। लॉटरी में शामिल होने के लिए रविवार तक ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि थी।

इससे पहले 24 हजार 425 निजी विद्यालयों में निशुल्क प्रवेश के लिए पांच लाख 73 हजार 338 आवेदन मिले। मंगलवार को निकाली गई लॉटरी के बाद अब वरीयता सूची के आधार पर विद्यार्थियों को विद्यालयों में उनके दस्तावेज चैक कर प्रवेश दिया जाएगा जिममें आठ मई तक विद्यालयों में आवेदन जमा करवाने होंगे। 


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Monday, May 1, 2017

Praveen Singh

अब आंगनबाड़ी कर्मियों की मांग- राज्य कर्मचारी बनाए जाए हमें, मानदेय कम से कम 15,000 हो


जयपुर.
दुनियाभर में एक मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है। ऐसे में छोटे तबके के लोग स्वयं को सशक्त कराने की उम्मीद लिए सरकार की देहरी खटखटाते हैं। हालांकि, राजस्थान में आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने भी स्वंय को तत्काल राज्य कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग की है।

मानदेय कम से कम पन्द्रह हजार करे सरकार: संघ

राजधानी में आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने रविवार को मांग की कि उनका मानदेय कम से कम पन्द्रह हजार रुपए किया जाना चाहिए। अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के संस्थापक संरक्षक छोटेलाल बुनकर ने हथरोई क्षेत्र के एक होटल में सरकार के लिए यह कहा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में आंगनबाड़ी महिलाओं को मात्र 4300 रुपए का मानदेय मिलता है। इस दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि महिला पर्यवेक्षक के रिक्त 50 प्रतिशत पद आंगनबाड़ी कार्यकताओं से भरे जाएं, आशा सहयोगनियों को एएनएम के समकक्ष मानते हुए चिकित्सा विभाग में पदस्थापन किया जाए, एएनएम भर्ती में बीस प्रतिशत पद आशाओं के लिए आरक्षित कर शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन अवकाश देने चाहिए।

प्रदेशाध्यक्ष शशि योगेश्वर ने बताया कि यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंगनबाड़ी महिला 3 मई, 14 व 15 जून को सांकेतिक कार्य बहिष्कार करेंगी। यदि फिर भी सरकार नहीं चेती तो तीन माह बाद हड़ताल की जाएगी।


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Saturday, April 29, 2017

Praveen Singh

आज होगा राजस्थान विश्वविद्यालय का एकेडमिक सत्र पूरा,1 मई से गर्मियों का अवकाश

जयपुर।

राजस्थान विश्वविद्यालय का इस सत्र का एकेडमिक सत्र आज पूरा हो जाएगा। हालांकि एकेडमिक सत्र तीस अप्रैल तक होना था लेकिन कल रविवार अवकाश होने के कारण विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र 2016-17 का आज यह आखिरी दिन होगा। इसके बाद राजस्थान यूनिवर्सिटी में 1 मई से दो महीने का गर्मियों का अवकाश शुरू हो जाएगा। एकेडमिक सत्र खत्म होने के साथ ही अब छात्रसंघ पदाधिकारियों का कार्यकाल भी आज समाप्त हो जाएगा जिसके बाद उन्हें छात्रसंघ कार्यालय खाली करने होंगे।

साथ ही विश्वविद्यालय के केंद्रीय छात्रसंघ कार्यालय का कब्जा फिर से छात्र कल्याण अधिष्ठाता को संभलाना होगा। हालांकि अभी प्रोफेशनल पाठयक्रम एलएलबी, बीबीए, बीसीए की परीक्षाएं होना बाकी हैं। साथ ही यूजी व पीजी की परीक्षाएं जारी हैं। लेकिन अवकाश के दौरान विश्वविद्यालय के सभी प्रशासनिक कार्य होते रहेंगे और परीक्षाएं चलती रहेगी। साथ ही जो शिक्षक परीक्षा कार्यों में लगे हुए है उनके लिए अवकाश नहीं रहेगा बल्कि अवकाश के दौरान परीक्षाओं व अन्य कार्यों के लिए जो शिक्षक कार्य संभाल रहे है उन्हें विश्वविद्यालय के नियमानुसार ही छुट्टियां मिलेगी।

15 जून तक जारी किया जाएगा रिजल्ट। सभी यूजी और पीजी की परीक्षाओं के परिणाम 15 जून तक घोषित कर दिए जाएंगे। जिसके बाद जून माह में आगामी सत्र 2017-18 के लिए प्रवेश प्रकिया शुरू होगी। लेकिन विश्वविद्यालय में एसओजी की कार्रवाही होने के कारण इस बार समय पर परीक्षा जारी होने में संदेह उत्पन्न हो रहा हैं। 

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Friday, April 28, 2017

Praveen Singh

थर्ड ग्रेड टीचर्स की भर्ती का रास्ता साफ, 3 साल बाद जा सकेंगे शिक्षा विभाग में


जयपुर। राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कई बड़े फैसले किए गए हैं। पंचायत राज विभाग के अधीन आने वाले तृतीय श्रेणी शिक्षकों को अब केवल तीन साल में ही शिक्षा विभाग में भेजा जा सकता है। ऐसे में पंचायत राज में तृतीय श्रेणी के शिक्षकों की ज्यादा भर्ती हो सकेगी। यह हुए फैसले...

 
- कैबिनेट की बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री की ओर से मीडिया की ब्रीफिंग देते हुए मंत्री यूनुस खान ने यह जानकारी दी।
- उन्होंने बताया कि पंचायत राज विभाग के अधीन काम करने वाले तृतीय श्रेणी शिक्षकों को शिक्षा विभाग के अधीन आने के संबंध में अब तक 5 साल का क्लॉज था। यानी वे पांच साल पंचायत राज के अधीन काम करने के बाद ही शिक्षा विभाग में पदोन्नत हो सकते थे, लेकिन अब इस क्लाॅज को 5 साल से कम कर 3 साल करने का फैसला किया गया है।
- इसका फायदा ये होगा कि शिक्षा विभाग के उच्च पदों पर खाली पड़े पदों को भरने के लिए पंचायत राज के शिक्षक जल्दी-जल्दी शिफ्ट होंगे।
- ऐसे में शिक्षा विभाग के खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरा जा सकेगा, शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सकेगा।
- इसके बाद पंचायत राज में खाली होने वाले पदों के लिए सरकार आमतौर पर हर साल रिक्तियां निकालकर भर्ती कर सकेगी।
- इसके अलावा कैबिनेट में कई अन्य फैसले भी किए गए।


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Monday, April 24, 2017

Praveen Singh

12:30 तक लगेंगे स्कूल, नहीं की छुट्टी तो विद्यालयों के खिलाफ होगी कार्रवाई:सिद्धार्थ महाजन

जयपुर ।

जिले में लगातार तेज पड़ रही गर्मी को देखते हुए कलेक्टर ने जिले में स्थित सभी प्राइवेट व सरकारी स्कूलों के समय में परिवर्तन किया हैं। शुक्रवार को जिला कलेक्टर ने सभी बच्चों की छुट्टी दोपहर 12.30 बजे तक करने के निर्देश दिए है। जिसके बाद आज से यह आदेश सभी विद्यालयों पर लागू होंगे। तेज धूप और तपती बसों के सफर में बच्चे बीमार होने लगे है।

जिला कलेक्टर ने गर्मी को देखते हुए दिए आदेश

 साथ ही जिला कलेक्टर ने एेसा नहीं करने वाले विद्यालय संचालकों को चेताया भी है कि 12.30 बजे तक स्कूल की छुट्टी नहीं करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि जयपुर में गर्मी के कारण पारा 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक तक पहुंचने के बाद बच्चों में हीट स्ट्रोक के खतरे को देखते हुए कलेक्टर सिद्धार्थ महाजन ने समय बदलने का निर्देश दिया हैं। लेकिन जिन स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं वह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम और पूर्व निर्धारित समय पर ही आयोजित होगी। 

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Praveen Singh

छात्रों की शिकायत का तुरंत होगा समाधान, इग्नू ने लांच किया पोर्टल

जयपुर। इंदिरा गांधी रार्ष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) अब विद्यार्थियों की शिकायतों का तुरंत समाधान करेगा। इसके लिए इग्नू ग्रीवांस रेड्रेसस एंड मैनेजमेंट सर्विस नाम से ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से इग्नू के लर्नर्स अपनी किसी भी समस्या, इग्नू सेवाओं से जुड़ी जानकारी, परीक्षा, असाइनमेंट्स, डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, पाठ्य सामग्री, अध्ययन केंद्र, प्रवेश, इग्नू द्वारा संचालित पाठ्यक्रम, प्रोजेक्ट्स, सिनोप्सिस, प्रक्टिकल्स और दिन-प्रतिदिन  छात्रों को होने वाली छोटी-बड़ी परेशानियों सहित आदि की जानकारी तत्काल प्रभाव से प्राप्त की जा सकती है। इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र जयपुर के सहायक क्षेत्रीय निदेशक एवं प्रवेश प्रभारी कमलेश मीना ने कहा कि देश के सभी नागरिकों तक दूरस्थ माध्यम से उच्च शिक्षा देने का कार्य कर रही है। इग्नू में 32 लाख से अधिक विद्यार्थी 230 पाठ्यक्रमों में पंजीकृत है।

नहीं मिलती थी सूचना
इग्नू इस बात को स्वीकार करता है कि कई बार समय पर छात्रों को सूचना नहीं मिलने के कारण अपने पाठ्यक्रम को पूरा करने में कठिनायों का सामना करना पड़ता है। इग्नू ने सबको ध्यान में रखकर इस सेवा की शुरुआत की है, ताकि अधिकतम समय छात्रों का अध्ययन में व्यतीत हो। 

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Praveen Singh

उच्च शिक्षा में पर्सेंटाइल सिस्टम खत्म करने की तैयारी

जयपुर। उच्च शिक्षा विभाग की प्रवेश प्रक्रिया में अब बदलाव की कवायद चल रही है। तीन साल पहले शुरू किए गए पर्सेंटाइल फॉर्मूले को अब खत्म करने की पूरी तैयारी कर ली है। ऐसे में नए शैक्षणिक सत्र 2017-18 में नए फॉर्मूले के तहत प्रवेश प्रक्रिया देखने को मिल सकती है। ऐसे में यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद से प्रवेश पर सवाल उठने लग गए और अब इसमें बदलाव किया जाएगा, जिससे की सीबीएसई के छात्र राज्य में ही पढ़ाई कर सके। पर्सेंटाइल सिस्टम लागू होने के बाद से राजस्थान के छात्र दूसरे राज्य में पढ़ाई के लिए अधिक जा रहे हैं। दरअसल इस सिस्टम में 90 फीसदी अंक होने के बाद भी सीबीएसई के छात्रों को प्रवेश नहीं मिलता था। इसमें करीब 80.20 का अनुपात से प्रवेश होता था और अधिक अनुपात राज्य बोर्ड का होता था। प्रदेशभर के करीब 210 से अधिक सरकारी कॉलेज और राजस्थान यूनिवर्सिटी के संगठक कॉलेजों में दाखिला होता है।


आरबीएसई विद्यार्थियों को मिला फायदा तो सीबीएसई के छात्र पढ़ाई के लिए जाने लगे राज्य से बाहर
बनाई कमेटी
पर्सेंटाइल सिस्टम को राजस्थान बोर्ड के छात्रों को फायदा देने के लिए लागू किया, लेकिन इसमें सीबीएसई छात्रों की पीड़ा बढ़ गई। इस दौरान जो समस्या पहले राजस्थान बोर्ड के छात्रों के साथ थी वह अब सीबीएसई के साथ हो रही है। पहले राज्य बोर्ड के छात्र प्रवेश के झूजते थे और अब सीबीएसई के छात्र झूज रहे है। इससे निजात पाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एक कमेटी बनाई है।


बच्चों का नहीं होगा नुकसान
उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने कहा कि पर्सेंटाइल योजना राजस्थान बोर्ड के बच्चों को फायदा पहुंचाने के लिए की गई थी, लेकिन इसका नुकसान देखने को मिला। उच्च शिक्षा विभाग ने सिस्टम को लेकर एक कमेटी का गठन किया है। माहेश्वरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं की प्रवेश में कोई ऐसा बीच का रास्ता निकाला जाए, जिससे ना राजस्थान बोर्ड के बच्चों को नुकसान हो और ना ही सीबीएसई के बच्चों का। 

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Monday, April 17, 2017

Praveen Singh

राजस्थान में 10,000 से ज्यादा बच्चों की जिंदगी में आई 'अक्षर ज्ञान' की रोशनी, मिली दुनिया में ख्याति

जयपुर.
सरकार यूं तो अपने स्तर पर साक्षरता मिशन के जरिए लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है लेकिन कुछ संस्थाएं भी अपने स्तर पर इस कार्य को करने में जुटे हुए हैं।

उन्हीं में से एक है गोविन्द नगर पूर्व में चल रही प्रवीण लता संस्थान जो बिना किसी लोभ और स्वार्थ के कच्ची बस्तियों के उन बच्चों के जीवन में शिक्षा की अलख जगाने का प्रयास कर रही है जो शायद ही कभी अपने जीवन में स्कूल की चौखट देख पाएं हों। इतना ही नहीं डॉप आउट्स को भी वापस स्कूल भेजने में भी इनके प्रयास सराहनीय है।

गैर सरकारी संगठन की कवायद से कच्ची बस्ती के बच्चों को शिक्षा

 बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिला रोजगार और बालिका शिक्षा व सुरक्षा के प्रति कार्यरत इस संस्थान के प्रयास से अभी तक दस हजार से भी ज्यादा बच्चों को अपना भविष्य संवारने का अवसर मिल चुका है।

घर से की शुरुआत

संस्थान की डायरेक्टर भारती सिंह ने बताया कि उनके इस मिशन से कई वॉलंटीयर्स भी जुड़े हुए हैं। इनमें अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ, स्कूल व कॉलेज के स्टूडेंट्स, टीचर्स और निजी ऑफिस में काम करने वाले लोग इन बच्चों के साथ जुड़े हुए हैं। यहां आकर वो इन बच्चों को हाइजीन, विभिन्न सब्जेक्ट्स, क यूनिकेशन स्किल्स, पर्सनैलिटी डवलपमेंट, इंग्लिश क यूनिकेशन और एटिकेट्स के अलावा गुड टच बैड टच, वुमन राइट्स और बच्चों के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हैं।

इसमें इंटरनैशनल वॉलंटीयर्स भी हैं जो साल में दो से तीन बार यहां आकर इन बच्चों के साथ वक्त बिताते हैं। घर में ही चलने वाली इन बच्चों की कक्षाओं में पढ़ाई के अलावा जूडो-कराते, थिएटर, सिलाई-कढ़ाई-बुनाई और हस्तकला में भी प्रशिक्षित किया जाता है।

ये काम करती है संस्थान

संस्थान के प्रमुख उद्देश्य जरुरतमंद बच्चों का सर्वांगीण विकास, महिलाओं में रोजगारोन्मुख आत्मनिर्भरता और जागरुकता लाना है

-बच्चों के लिए बालसभा, मस्ती की पाठशाला का आयोजन किया जाता है

-महिलाओं और बालिकाओं के लिए जागृति कार्य भी करते हैं, जिसमें इनसे जुड़े मुद्दों पर संगोष्ठी और कार्यशाला का आयोजन कर उन्हें अपनी सुरक्षा और आत्मरक्षा के प्रति जागरुक करना है

फैक्ट फाइल

-10,000 बच्चे अब तक हो चुके हैं लाभान्वित

-8,000 से ज्यादा लड़कियों को शिक्षित कर चुके हैं चार साल में

-04 अन्तरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं संस्थान को अब तक

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