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Monday, July 3, 2017

Praveen Singh

स्कूल ड्रेस के रंग के फेर में फंसे अभिभावक



बाड़मेर.

सरकारी स्कूलों में गणेवश बदलाव का आदेश अभिभावकों के लिए परेशानी बन गया है। परेशानी यह हो गई है कि जो रंग विभाग के आदेश में बताया गया था, सैम्पल में भेजे गए कलर से मैच नहीं करता है। जिसके कारण अभिभावक परेशान हो रहे हैं। स्कूल खुलने के बाद बच्चों के लिए कईयों ने ड्रेस के लिए कपड़ा तो किसी ने रेडिमेड ड्रेस ही खरीद ली। अब बच्चे नई ड्रेस पहनकर स्कूल जा रहे हैं तो अध्यापक उनको घर भेज रहे हैं कि यूनिफॉर्म का रंग अलग है। आदेश अनुसार ही ड्रेस का रंग होना चाहिए। इसके चलते बच्चों के साथ अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है।

मनमर्जी से ले आए कपड़ा

कई दुकानदारों ने स्कूल की नई पोशाक को अपने हिसाब से तय कर लिया और कपड़ा ले आए। अभिभावक इनके पास कपड़ा लेने पहुंचे तो जो उपलब्ध था वो दे दिया। इसमें अधिकांश ने तो गहरा कत्थई और मैहरून रंग का कपड़ा दिया। जिसका पोशाक के रंग से दूर-दूर तक लेना-देना ही नहीं। अभिभावक कपड़ा लेकर अब वापस आ रहे हैं । जिन्होंने पोशाक सिलवा ली वे खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

क्या है सरकारी आदेश में

शिक्षा निदेशालय की ओर से नवीन सत्र में छात्रों के लिए पैंट या हॉफ पैंट कत्थई रंग तथा शर्ट हल्का भूरे रंग का निर्धारित किया है। वहीं छात्राओं के लिए सलवार, स्कर्ट व चुन्नी कत्थई रंग की तथा कुर्ता या शर्ट हल्के भूरा रंग का होना चाहिए। इस प्रकार के आदेश जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से समस्त ब्लॉकों में भेजे जा चुके हंै।

जहां पहुंचानी थी जानकारी वहां नहीं दी

गणवेश परिवर्तन होने के साथ ही जिला शिक्षा अधिकारियों को इसका सैम्पल भेज दिया गया। यह सैम्पल ब्लॉक शिक्षा अधिकारी तक पहुंच गया। लेकिन कपड़े के नमूनों को लेकर अभिभावकों को कोई जानकारी नहीं मिली। इसलिए अभिभावकों ने बाजार में नई ड्रेस के अनुसार जो कपड़ा या रेडिमेड यूनिफॉर्म मिल रही है, उसे खरीद लिया। अब ड्रेस का रंग ही परेशानी बन गया है।

आदेश में कुछ, सैम्पल में कुछ और

आदेश में कत्थई कलर की पैंट बताई गई है।  जबकि निदेशालय की ओर से भेजे गए सैंपल में पैंट का रंग डार्क ब्राउन नजर आ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के साथ अभिभावक व शिक्षकों के लिए भी परेशानी बनी हुई है कि आखिर कौनसे रंग की गणवेश सही है।

ये भी हुआ

आदेश के बाद व्यापारियों ने बड़ी मात्रा में कपड़ा खरीद लिया। कई व्यापारी तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने बकायदा यूनिफॉर्म की सिलाई करवा कर भी रख लिया। जिससे अभिभावक को आते ही सीधे कपड़े की बजाय ड्रेस ही दे दी जाए। अब यही ड्रेस दुकानदारों के लिए समस्या बन गई है। जो अभिभवक खरीदकर ले जाते हैं, लेकिन रंग दूसरा होने पर वापस ला रहे हैं।

वापस ला रहे हैं यूनिफॉर्म

सरकारी आदेश के अनुसार हमने कपड़ा खरीदकर यूनिफार्म की सिलाई कर दी। कई विद्यार्थी गणवेश लेकर गए लेकिन अब दूसरा रंग बताकर वापस दे रहे हैं।-गणेश दर्जी, निम्बल कोट कपड़ा व्यापारी

सभी परेशान हैं

सरकारी आदेश में जो लिखा था उसके अनुसार कपड़े का स्टॉक खरीद लिया। लेकिन विभाग में जो सैम्पल आया है वो दूसरा है। सभी परेशान हो रहे हैं।- भेराराम देवासी, कपड़ा व्यापारी

ब्लॉक मुख्यालय पर सैंपल भेजे हैं

सरकार के निर्देशानुसार जो आदेश आया है उसके अनुसार गणवेश जारी की गई है। सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर सैम्पल भेजे जा चुके हंै। उसके अनुसार ही गणवेश खरीदें।- ओमप्रकाश शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक

आदेश में है वही लागू होगा

निदेशालय से जो आदेश प्राप्त हुए हैं उसके अनुसार गणवेश लागू की गई है। सैम्पल देखकर ही गणवेश खरीदनी चाहिए। -प्रेमचंद सांखला, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक


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Monday, May 22, 2017

Praveen Singh

छुट्टियां मनाने की बजाय दें भविष्य संवारने पर ध्यान


बाड़मेर.

प्रतियोगी परीक्षा में गांवों के बच्चे पिछड़े नहीं और वे हर विषय के प्रति ज्ञान रखें। इसको लेकर राउमावि खड़ीन ने अनुपम पहल की है। यहां अध्ययनरत 125 विद्यार्थियों को पिछले 21 दिन से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा रही है। इसमें विद्यालय स्टाफ के साथ आसपास के विद्यालयों के अध्यापक नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं। फिफ्टी विलेजर्स टीम के साथ प्रशासनिक सेवा, चिकित्सका, शिक्षा सहित अन्य सेवाओं में चयनित अधिकारी यहां पहुंच बच्चों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस शिविर में 75 बालिकाएं हैं, जो यह ज्ञान सीख रही हैं।

बालिका शिक्षा सुखद अनुभव

शिविर में 125 विद्यार्थी पढऩे आ रहे हैं। इसमें अधे से ज्यादा बालिकाएं हैं, जो की समाज की बदलती सोच का सुखद अनुभव करवा रही है। गौरतलब है कि जिले में अभी भी बालिका शिक्षा को इतना बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है। एेसे में बालकों से ज्यादा बालिकाएं शिविर से जुड़ी होना अपने आप में महत्वपूर्ण बात है।

प्रतिभाओं को मिलेगा मार्ग दर्शन

अब पढ़ाई का तरीका बदल गया है। एेसे में गांवों की प्रतिभाओं को उचित मार्ग दर्शन नहीं मिलने पर वे पिछड़ सकती है। हमने यह पहल की है कि अभी से इन बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का तरीका बताया जाए। इससे वे इन परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।- तनवीरसिंह डउकिया, प्रधानाचार्य राउमावि खड़ीन


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Wednesday, May 17, 2017

Praveen Singh

जबरन थोपे प्रशिक्षण में शिक्षक पड़े भारी, सुबह की हाजिरी में 120, रात को मिले सात


बाड़मेर.

शिक्षक संघों के विरोध के बावजूद सरकार की ओर से शुरू किए ग्रीष्मकालीन आवासीय शिक्षक प्रशिक्षण शिविरों में शिक्षक ही भारी पड़ रहे हैं। पत्रिका टीम ने मंगलवार को ऐसे आवासीय शिविर स्थलों की टोह ली तो दो से चार अध्यापक ही नजर आए। हालांकि इसमें प्रावधान बायोमीट्रिक हाजिरी का भी है। प्रतिदिन सुबह-शाम बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य की गई है, लेकिन इसकी पालना भी नहीं हो रही है। इधर, शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि शिविर स्थल पर सरकार कोई सुविधा ही नहीं दे रही। ऐसे में वहां रुकना मुमकिन नहीं है।

यहां ये मिले हालात

स्थान- महाबार रोड स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर

समय- रात 11:30 बजे

स्थिति- यहां साठ-साठ के समूह में दो शिविर चल रहे हैं। जहां रात को महज सात शिक्षक गहरी नींद में सो रहे थे। यहां शिक्षकों ने सुबह आवासीय शिविर का काली पट्टी बांधकर विरोध भी किया था। रात्रि भोजन के बाद करीब 95 प्रतिशत शिक्षकों ने घर की राह पकड़ ली।

बायोमीट्रिक का कार्य धीमा

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को उपस्थिति पर नजर रखने के लिए सरकार ने बायोमीट्रिक मशीन लगाई है। ऐसे में एक ही मशीन होने से 60 शिक्षकों को कतार में लगना पड़ता है। अधिकांश बार इसमें एक घंटे से अधिक का समय लग जाता है। जबकि मंगलवार को बायोमीट्रिक मशीन खराब होने से कई शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज ही नहीं हो पाई। प्रशिक्षण के दौरान शाम 7 बजे के बाद महज खाने के अलावा कोई कार्यक्रम ही नहीं है। इसके बावजूद सरकार ने शिक्षकों को रात में रुकने के लिए पाबंद किया है। महिला शिक्षकों को इससे ज्यादा परेशानी हो रही है।

चिकित्सा किट नहीं

आवासीय शिविर में एक बैच में 60 शिक्षण प्रशिक्षण लेते हैं। ऐसे में गर्मी के मौसम में अचानक खराब हो जाए तो विभाग के पास में चिकित्सा सेवा किट भी उपलब्ध नहीं है। 

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Monday, May 1, 2017

Praveen Singh

16731 परीक्षार्थी, 08 हजार अभिभावक, 02 घंटे जाम


बाड़मेर.
बीएसटीसी परीक्षा का आयोजन रविवार को किया गया। शहर के 47 केन्द्रों पर 16731 परीक्षार्थी बैठे। राजकीय महिला महाविद्यालय में एक परीक्षार्थी के प्रश्न पत्र घर पर लेकर चला गया। इसके पीछे पहुंचकर प्रश्नपत्र लाया गया। इससे कॉलेज प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। बीएसटीसी परीक्षा दोपहर 2 से 5 बजे तक आयोजित हुई। इसमें 18533 परीक्षार्थी नामांकित थे। 1802 अनुपस्थित रहे।

क्यों हुई भीड़- 16731 परीक्षार्थियांे के साथ करीब आठ हजार अभिभावक भी पहुंचे। दूरस्थ गांवों से आए परीक्षार्थी एक गांव से आठ दस थे तो अपना निजी वाहन लेकर ही आए और यहां से इसी वाहन से रवाना हुए। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली बसें भी परीक्षार्थियों की भीड़ को लेकर पहुंची थी। एेसे में शहर में परीक्षा खत्म होते ही भीड़ बढ़ गइ।

लग गया जाम- 

शहर में शाम 5.30 से 7 बजे तक जगह-जगह जाम लग गया। सिणधरी चौराहा, रेलवे स्टेशन, चौहटन चौराहा, हाईवे पर वाहनों की कतार लगी थी। इस दौरान पुलिस के लिए यातायात व्यवस्था संभालना मुश्किल हो गया। करीब 2 घंटे बाद जाम हट पाया। 

प्रश्न पत्र लेकर चला गया अभ्यर्थी

बीएसटीसी परीक्षा देने के बाद एक परीक्षार्थी प्रश्न पत्र साथ लेकर चला गया। कॉलेज प्रशासन को इसकी भनक भी नहीं लगी। करीब एक घंटे बाद गिनती हुई तो एक प्रश्न पत्र कम पाया गया। इस पर कॉलेज प्रशासन के हाथ पांव फूल गए।

जानकारी अनुसार बीएसटीसी परीक्षार्थी चेनाराम सोडियार परीक्षा खत्म होने के बाद प्रश्न पत्र साथ में लेकर रवाना हो गया। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी को भनक ही नहीं लगी। प्रश्न पत्र कम और उपस्थिति पूर्ण होने पर कॉलेज प्रशासन हरकत में आ गया। करीब डेढ़ घण्टे की मशक्कत के बाद कॉलेज प्रशासन का कर्मचारी परीक्षार्थी के पास पहुंचा और प्रश्न पत्र वापस लेकर आया, तब कॉलेज प्रशासन ने राहत की सांस ली।

गेट पर पकड़ लिया था

परीक्षार्थी पश्न पत्र लेकर बाहर निकल गया था। लेकिन उसे गेट पर ही पकड़ लिया था। - डॉ. ललिता मेहता, प्राचार्य, एमबीसी गल्र्स कॉलेज 


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Monday, April 24, 2017

Praveen Singh

शिक्षक दंपती ने बंद नहीं होने दिया बाड़मेर का यह सरकारी स्कूल


प्रदेश में सैकड़ों सरकारी स्कूल नामांकन कम होने के कारण बंद हो गए, लेकिन जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर एक स्कूल वहां के एक शिक्षक और उसकी पत्नी के संकल्प के चलते मर्ज होने से बच गया। उन्होंने घर-घर जाकर अभिभावकों से बच्चों को स्कूल भेजने का आग्रह किया। दो किमी के दायरे के घर-घर से बच्चों को स्कूल लाए और उनके ठहराव के तमाम जतन किए। माहौल एेसा बना कि एक साल में ही यहां अध्ययनरत छात्र 16 से बढ़कर 95 हो गए। जिस स्कूल को बंद करने का नोटिस मिला अब उसके आठवीं तक क्रमोन्नति का आग्रह हो रहा है।

भादरेस के गुरुओं की ढाणी स्कूल में अध्यापक यशंवत श्रृंगी की नियुक्ति को कुछ ही दिन हुए थे कि स्कूल में महज 16 बच्चे होने से उसके मर्ज होने का संकट आ गया। श्रृंगी ने पत्नी को बताया कि अब तो दूसरी जगह तलाशनी होगी यहां तो स्कूल बंद हो रहा है। पत्नी शीतल श्रृंगी भी बीएसटीसी बीएड हैं। दोनों ने स्कूल को मर्ज होने से बचाने की ठान ली। शीतल ने कहा कि वो भी स्कूल में नि:शुल्क पढ़ाएंगी। दोनों ने प्रधानाध्यापिका ललिता को यह बात बताई तो उन्होंने सहमति दे दी। फिर वे अभिभावकों के द्वार पहुंचे और अपना संकल्प जताया। शिक्षक और उसकी पत्नी की इस भावना पर अभिभावक भी जागरुक हुए और स्कूल में बच्चों का नामांकन बढऩे लगा। कुछ ही दिनों में स्कूल में पढ़ाई और माहौल की चर्चा फैली तो बच्चों की संख्या बढऩे लगी। एक साल में ही छात्र संख्या 95 होने पर ग्रामीणों ने स्कूल को आठवीं तक क्रमोन्नत करने का आग्रह विभाग से किया है।

जागरुक हुए ग्रामीण

स्कूल में मूलभूत सुविधाओं के लिए पहले शिक्षक दंपती और शाला प्रधान ने कोटा और झुंझुनंू से भामाशाह तैयार किए। उनके सहयोग से शिक्षण सामग्री उपलब्ध करवाई। साथ ही भवन के रंग रोगन कर विद्यालय को सुंदर बनाया। ग्रामीणों ने भावना देखी तो वे भी जुट गए और अब यहां विद्युत व नल कनेक्शन, टीनशैड का निर्माण हो गया है। ग्रामीणों को अब भरोसा है कि यहां पढ़ाई का माहौल मिलेगा।

-शुरू में विश्वास नहीं था। अध्यापक के साथ उनकी पत्नी नि:शुल्क पढ़ाने लगी तो एेतबार हुआ। अब तो हमारा स्कूल आठवीं में क्रमोन्नत होना चाहिए।- किशनलाल गर्ग, अभिभावक

-लगता नहीं कि यह वही विद्यालय है जिसके बंद होने की चर्चा थी। इस तरह समर्पण से कोई पढ़ाए तो एक भी विद्यालय बंद नहीं हो सकता।- हमीराराम, अध्यापक

-बच्चों के निजी स्कूल में प्रवेश का मानस बना चुके थे लेकिन इसके बाद सरकारी स्कूल में विश्वास दिलाया तो यहीं पर बच्चे अब सीख रहे हैं।- चंद्रपाल चारण, अभिभावक


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Praveen Singh

पत्रिका अभियान का बड़ा असर- 4237 स्कूलों में चरण पादुका दिवस, 3.54 लाख बच्चों ने ली शपथ


बाड़मेर.
नंगे पांव स्कूल जाने वाले बच्चों की पीड़ा समझते हुए पत्रिका की ओर से प्रारंभ किया गया अभियान तपन भरी राह, बने नन्हों के हमराही के तहत सोमवार को बड़ा असर हुआ। जिले की 4237 स्कूलों में शिक्षकों व अभिभावकों ने नंगे पांव स्कूल आने वाले बच्चों के लिए जूते उपलब्ध करवाने के लिए चरण पादुका दिवस आयोजित हुआ। जिला कलक्टर सुधीर कुमार ने जिले की एक स्कूल में अपनी ओर से जूते उपलब्ध करवाए तो यहां के प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ ने 51 हजार के जूते उपलब्ध करवाए है। साथ ही जिलेभर में अभिभावक, सामाजिक संगठन और भामाशाहों ने स्कूल पहुंचकर नंगे पांव स्कूल आने वाले बच्चों को जूत उपलब्ध करवाने की हौड़ दिखी।

जिला कलक्टर बच्चों को जूते पहनाते हुए

जिला कलक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने जिला मुख्यालय की गांधीनगर सरकारी स्कूल में नंगे पांव स्कूल आने वाले बच्चों को अपनी ओर से जूते पहनाते हुए उनसे कहा कि जूते पहनकर ही स्कूल आएं। जूते न हों तो शिक्षकों को बताएं वे आपके लिए प्रबंध करेंगे।

-विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ ने 50 हजार रुपए के जूते जिलेभर में उपलब्ध करवाने की घोषणा करते हुए संकल्प लिया कि 1 जुलाई तक सभी बच्चों को जूते उपलब्ध करवाने के लिए संघ पूरी मेहनत करेगा।-शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष नूतनपुरी

-जिलेभर में यह मुहिम सोमवार को चली। 4237 स्कूलों के 3 लाख 54 हजार बच्चों ने शपथ ली कि वे नंगे पांव सकूल नहीं आएंगे और विद्यालय प्रबंधन समितियों, अभिभावकों और शिक्षकों ने भी संकल्प लिया कि वे इसक लिए लगातार बच्चों को प्रेरित करेगे।- बीईईओ कृष्णसिंह बाड़मेर


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